Arshohar, 80 Ta...

174.11

Indication: An effective ayurvedic treatment of dry & bleeding piles and is very effective in smoothing the bowels.

  1. Assures Long term relief
  2. Helps to treat piles
  3. Prevents Reoccurrence
  4. Helps shrink pile marks
  5. Repairs damaged tissues.

Dose: 2-2 Tablet morning and evening with water or as directed by the physician.

अर्शोहर

गुणधर्म: यह खूनी एवं बादी दोनों प्रकार के अर्श (बवासीर) के लिए अत्यन्त लाभप्रद औषधि है। अर्श रोग में विशेषतः अग्निमांद्य हो जाता है, उदर में वायु की उत्पत्ति होती है, सरलता से शौच शुद्धि नहीं होती, मलावरोध बना रहता है, यकृत निर्बल हो जाता है जिससे पित्त का स्त्राव कम होता है। तथा अरूचि, व्याकुलता और निर्बलता आदि लक्षण अर्श के रोगी को होते है। खूनी बवासीर में मस्सों से खून निकलने लगता है तथा वादी बवासीर में मस्सों में वायु भर जाने से मस्से फूल जाते है। और उनमें सुई चुभने सी पीड़ा होती रहती है। अर्शोहर के सेवन से मलावरोध दूर होता है। अग्नि प्रदीप्त होती है। वायु का अनुलोमन होता है। मस्सों से खून गिरना बंद हो जाता है। तथा मस्से सूख जाते है। एवं शारीरिक बल की वृद्धि होती है। यह इस रोग पर तत्काल प्रभावकारी औषधि है।

मात्रा: 2-2 टेब. सुबह-शाम मट्ठे से या जल से या चिकित्सक के परामर्श से।

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Indication: An effective ayurvedic treatment of dry & bleeding piles and is very effective in smoothing the bowels.

  1. Assures Long term relief
  2. Helps to treat piles
  3. Prevents Reoccurrence
  4. Helps shrink pile marks
  5. Repairs damaged tissues.

Dose: 2-2 Tablet morning and evening with water or as directed by the physician.

अर्शोहर

गुणधर्म: यह खूनी एवं बादी दोनों प्रकार के अर्श (बवासीर) के लिए अत्यन्त लाभप्रद औषधि है। अर्श रोग में विशेषतः अग्निमांद्य हो जाता है, उदर में वायु की उत्पत्ति होती है, सरलता से शौच शुद्धि नहीं होती, मलावरोध बना रहता है, यकृत निर्बल हो जाता है जिससे पित्त का स्त्राव कम होता है। तथा अरूचि, व्याकुलता और निर्बलता आदि लक्षण अर्श के रोगी को होते है। खूनी बवासीर में मस्सों से खून निकलने लगता है तथा वादी बवासीर में मस्सों में वायु भर जाने से मस्से फूल जाते है। और उनमें सुई चुभने सी पीड़ा होती रहती है। अर्शोहर के सेवन से मलावरोध दूर होता है। अग्नि प्रदीप्त होती है। वायु का अनुलोमन होता है। मस्सों से खून गिरना बंद हो जाता है। तथा मस्से सूख जाते है। एवं शारीरिक बल की वृद्धि होती है। यह इस रोग पर तत्काल प्रभावकारी औषधि है।

मात्रा: 2-2 टेब. सुबह-शाम मट्ठे से या जल से या चिकित्सक के परामर्श से।

 

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